क्रोध एक प्रतिक्रिया है । इस प्रतिक्रिया में यदि एक व्यक्ति क्रोध करता है, तो दूसरा व्यक्ति उसे देखकर क्रोधित हो उठता है, और इस प्रकार से क्रोध की प्रतिक्रिया समाज में व्याप्त हो जाती है । रामायण में इसका दृष्टांतस्वरूप है, प्रतापभानु का चरित्र । प्रतापभानु के मन में अमर होने की इच्छा उत्पन्न होती है । कपट मुनि उसकी इस दुर्बलता का लाभ उठाता है । कपट मुनि ने कहा कि यह तभी सम्भव है, जब हम अपने हाथों से भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलायेंगे । और ब्राह्मण जब प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगे, तो उसके परिणामस्वरूप तुम अमर हो जाओगे, तुम्हारी मृत्यु नहीं होगी । प्रतापभानु उस प्रलोभन में फँस जाता है । वह इसे स्वीकार कर लेता है । इसके पश्चात कपट मुनि का मित्र कालकेतु योजनाबद्ध रूप से भोजन का निर्माण करता है और इस पध्दति से करता है, जैसे अन्न और फल का मिश्रण हो । पर उसमें ब्राह्मण का माँस भी डाल दिया गया था । जिस समय आमन्त्रित ब्राह्मणों को भोजन के लिए बिठा दिया, उसी समय आकाशवाणी हुई - ब्राह्मणों ! इस रसोई में ब्राह्मण का माँस मिला है, आप लोग यहाँ से उठकर अपने-अपने घर को चले जाइए । इस अन्न को खाने में बड़ी हानि है ।
......आगे कल ....
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