मन्थरा यह तो समझती है कि मैं सिंहासन प्राप्त नहीं कर सकती, पर राम को सिंहासन पर बैठने से रोक तो अवश्य सकती हूँ । और तब परिणाम क्या होता है ? - अब उसने बुद्धि का प्रयोग करना प्रारंभ किया । उसने सोचा कि अब तो बस एक ही रात बची है, अब ऐसा कौन-सा उपाय किया जाय जिससे राम को राज्य न मिलने पाए । और तब मन्थरा योजना बनाती है और उस कुटिल योजना को लेकर कैकेयी के पास जाती है । और क्या करती है ? वही भेदबुद्धि से प्रारंभ करती है । वह कैकेयी से कहती है कि कल राम को राज्य मिलने वाला है । यह सुनकर कैकेयी अत्यंत प्रसन्न हो जाती हैं और यहाँ तक कह उठती हैं कि मन्थरा ! अगर यह समाचार सत्य है तो तुम जो माँगोगी वही दूँगी । यहाँ पर देखने से तो यही लगता है कि कैकेयी स्वस्थ हैं । पर इसके अंतरंग में पैठकर विचार करें तो क्या दिखाई देता है ? यहाँ पर गोस्वामीजी बड़ा ही सूत्र देते हैं ।
...सूत्र की चर्चा कल....
...सूत्र की चर्चा कल....
No comments:
Post a Comment