Monday, 18 July 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ........

भगवान श्रीराम, सीताजी और लक्ष्मण का एक रूप एतिहासिक है और दूसरा रूप है आध्यात्मिक । उनका यह आध्यात्मिक रूप क्या है ? जब भगवान राम चित्रकूट मैं निवास करते हैं तो गोस्वामीजी वर्णन करते हुए लिखते हैं कि भगवान श्रीराम, सीताजी और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करते हुए कैसे लग रहे हैं - श्रीराम मानो मूर्तिमान ज्ञान हैं । जनकनन्दिनी श्रीसीता मूर्तिमती भक्ति हैं और लक्ष्मण मूर्तिमान वैराग्य हैं । तो उन तीनों काम, क्रोध और लोभ के आने पर तीनों श्रीराम, श्रीसीता और लक्ष्मण का दूर चले जाना सर्वथा मनोवैज्ञानिक है । जब क्रोध आयेगा तो जीवन से ज्ञान दूर चला जाएगा, अर्थात श्रीराम दूर चले जाएँगे । और जब काम आएगा तो जीवन से भक्ति दूर चली जाएगी अर्थात श्रीसीताजी दूर चली जाएँगी । और जीवन में लोभ आएगा तो वैराग्य दूर चला जाएगा अर्थात घनीभूत वैराग्य लक्ष्मणजी दूर चले जाएँगे ।

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