मन्थरा की भूमिका क्या है ? मन्थरा कैकेयी के अन्तःकरण में भेद-बुद्धि उत्पन्न करके ज्ञान को जीवन से दूर कर देती है । मन्थरा कैकेयी के अन्तःकरण में राम के प्रति संशय उत्पन्न कर देती है । संशयात्मिका वृत्ति भक्ति की विरोधी है । एक तो मन्थरा ने कैकेयीजी के मस्तिष्क में इस घातक वृत्ति को पैठा दिया कि राम तुम्हारे अपने नहीं हैं, भरत तुम्हारे अपने हैं । और भक्ति की दृष्टि से भक्त को जब तक भगवान के प्रत्येक क्रियाकलाप में गुण और शील दिखाई देगा तथा उनके गुणों पर हमें विश्वास रहेगा, तभी तक हमारे जीवन में भक्ति रहेगी । पर मन्थरा ने कैकेयी के अन्तःकरण में संशय उत्पन्न कर दिया कि पहले तो राम तुमसे प्रेम करते थे पर अब बिल्कुल नहीं करते । अब तो वे सिंहासन पर बैठते ही भरत को कारागार में डाल देंगे । तुम्हें सौत की सेवा करनी पड़ेगी । कैकेयी के अन्तःकरण में राम के शील के प्रति संशय उत्पन्न हो गया, भक्ति विरोधी वृत्ति उत्पन्न हो गई । और जब उनमें राज्य का लोभ उत्पन्न कर दिया गया तो मानो वैराग्य-विरोधी वृत्ति की उत्पत्ति हो गई ।
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