मन्थरा एक साधारण परिवार में उत्पन्न हुई सामान्य नारीमात्र है । कई लोग यह समझते हैं कि मन्थरा ने जो कुछ किया, वह कैकेयी के हित के लिए किया । पर इस बात में सत्यता बिलकुल नहीं है । उसने जो कुछ किया उसमें कैकेयी का हित केवल एक दिखावा मात्र था । गोस्वामीजी कहते हैं कि लोभ के दो बल हैं - इच्छा और दम्भ । इच्छा होती है यह बात तो समझ में आती है, पर दम्भ भी होता है इसका क्या अर्थ है ? इसका अर्थ है कि लोभी अगर दूसरे के सामने लोभी दिखे तो उसकी इच्छा पूर्ण नहीं होगी । लोभी दम्भ करता है, दिखावा करता है कि उसके जीवन में लोभ नहीं है । और तब उसका परिणाम क्या होता है ? लोग ऐसे व्यक्ति पर विश्वास करके धोखा खाते हैं । जहाँ इच्छा के साथ दम्भ मिल जाता है, वहाँ ठगवृत्ति बहुत बढ़ जाती है ।
No comments:
Post a Comment