यह शूर्पणखा कौन है ? शूर्पणखा शब्द का अर्थ है - सूप के समान नाखूनवाली । जिसके नाखून सूप के समान हों वह शूर्पणखा है । वैसे तो शरीर में जितने अंग हैं उन्हें सुरक्षित रखना चाहिए, लेकिन उनमें से एक ऐसा भी है, जिसे काटते रहना चाहिए । और वह क्या है ? नाखून । वह जरा-सा भी बढ़ जाए तो कैंची लेकर उसे काट देना चाहिए । शरीर और अंगुली तो सुरक्षित रहेंगे, जब इस नाखून को काटते रहेंगे । और मन के संदर्भ में नाखून क्या है ? यह जो मन की वासना है, यही नाखून है । और इस वासना को विचार की कैंची से जो काटता रहेगा, वह व्यक्ति जीवन में सुरक्षित रहेगा । लेकिन जो अपने नाखून न कटावे, शूर्पणखा बन जाए तो उसका परिणाम क्या होगा ? यह होगा कि उसके नाक-कान दोनों कट जाते हैं । और इसका अभिप्राय यह है कि जो अपने जीवन में वासना को नहीं काटता रहेगा, अन्त में वह अनाद्रित होगा । भगवान का संकेत पाकर लक्ष्मणजी ने शूर्पणखा पर प्रहार किया और उसकी कुरुपता प्रकट हो गई ।
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