ज्ञान से क्रोध क्यों जुड़ा हुआ है ? क्रोध कैसे आता है ? अभी आप भोजन कर रहे हैं और भोजन करते समय अचानक जीभ अपने ही दाँतों से दब जाती है और केवल दब ही नहीं जाती, कभी-कभी तो कट भी जाती है और खून निकलने लगता है । पर इतना होने पर भी क्या आपको दाँतों पर क्रोध आता है ? क्या आप तुरन्त डाक्टर के पास जाकर यह कहते हैं कि इन दाँतों को आप निकाल दीजिए, इसने आज मेरी जिह्वा को काट दिया है । दाँत को दंड क्यों नहीं दिलवाते ? वैसे तो रास्ते में भीड़ में अगर पैर भी छू जाय तो लोग भिड़ जाते हैं कि तुमने मुझे पैर से मार दिया या धक्का दे दिया, देखकर नहीं चलते ? रामायण में इसका मनोविज्ञान बताया गया है । ज्ञान का अर्थ है कि जहाँ पर भेद-बुद्धि मिट गयी है । अद्वैत वृत्ति आ गयी है । और जहाँ पर अद्वैत वृत्ति रहेगी, वहाँ पर क्रोध कैसे आएगा । बिना द्वैत बुद्धि के क्रोध कैसा और बिना अज्ञान के क्या द्वैत बुद्धि हो सकती है ? क्रोध आ गया तो इसका अभिप्राय यह है कि अभी द्वैत बना हुआ है, अज्ञानता बनी हुई है ।
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