काम, क्रोध और लोभ की समस्या प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़ी हुई है और ज्ञानी, भक्त तथा कर्मी के जीवन में तो क्रोध, काम और लोभ की विशेष परीक्षा होती है । क्रोध के संदर्भ में ज्ञानी की बड़ी परीक्षा है । अगर क्रोध आ रहा है तो अभी ज्ञान में कहीं-न कहीं कोई कमी है । और काम के संदर्भ में भक्त की बड़ी परीक्षा है । यदि काम का आकर्षण उसको आकृष्ट कर रहा है तो सच्चे अर्थों में राम का आकर्षण उसके जीवन में नहीं है । और लोभ की वृत्ति अगर बनी हुई है तो उसके जीवन में निष्काम कर्म का सच्चा पालन नहीं हो रहा है । तो काम, क्रोध और लोभ ये तीनों क्रमशः भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग से जुड़े हुए हैं ।
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