Tuesday, 5 July 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

सारी अयोध्या की समस्या पर विचार करें, तो देखेंगे कि अयोध्या का सारा समाज काम, क्रोध, लोभ - तीनों से ग्रस्त हो गया है, सन्निपात ग्रस्त हो गया है । पर श्रीभरत ने केवल काम की चर्चा की । उन्होंने कहा कि इस समय अयोध्या में वात रोग हुआ है । और रामचरितमानस की भाषा में काम ही वात रोग है -
    काम वात कफ लोभ अपारा ।
तो श्रीभरतजी ने यहाँ पर जो केवल काम को महत्व दिया, इसका अभिप्राय यह है कि काम, क्रोध और लोभ इन तीनों पर विचार करके देखें तो सबके मूल में काम है । अगर पूरे घटनाक्रम पर विचार करें तो आपको लगेगा कि पहले काम वात आया, उसके बाद क्रोध कफ, और अन्त में क्रोध रूपी पित्त भी आया । इस प्रकार सारा समाज सन्निपात ग्रस्त हो गया ।

No comments:

Post a Comment