Monday, 26 December 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ........

विगत कुछ दिनों से जो प्रसंग आपके सामने चल रहा है, यह भगवान श्रीराम की यात्रा का है, परन्तु रामचरितमानस में एक यात्रा और आती है जिसका वर्णन बालकाण्ड में किया गया है । रावण की कथा जब हम पढ़ते हैं तो उसके पाप का, अत्याचार का, राक्षसत्व का वर्णन पढ़ने को मिलता है तो विचित्र सा लगता है, क्योंकि आपने उसके मूल चरित्र पर अगर ध्यान दिया होगा तो आप यह देखेंगे कि रावण प्रतापभानु के रूप में मूलतः मनुष्य था और यही मनुष्य राक्षस हो गया । मनुष्य का राक्षस हो जाना केवल त्रेतायुग का ही सत्य नहीं है बल्कि आज भी इस संसार में जो राक्षस आते हैं वे मनुष्य से ही राक्षस बनकर आते हैं । और मनुष्य राक्षस तब बन जाता है जब वह अपने पथ से भटक जाता है ।

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