जो व्यक्ति रावण बन गया वह कौन था ? इस पर यदि आप विचार करें तो आपको लगेगा कि जो व्यक्ति जीवन पथ से भटक गया वही रावण बन गया और वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं था । क्योंकि प्रतापभानु अपने सद्गुणों की दृष्टि से, अपने चरित्र की दृष्टि से महान था । वह भी चला, पर चलने के बाद भटक गया । कैसे भटक गया, इसका वर्णन करते हुए गोस्वामीजी कहते हैं - कैकेय देश में सत्यकेतु नाम के राजा थे । उन सत्यकेतु राजा के दो पुत्र हुए, प्रतापभानु और अरिमर्दन । सत्यकेतु ने वृध्दावस्था में राज्य का परित्याग कर दिया और श्रेष्ठ पुत्र प्रतापभानु को गद्दी पर बैठा दिया । प्रतापभानु सिंहासन पर बैठा और धर्मपूर्वक राज्य का संचालन करने लगा - उसके राज्य में ऐसा लगने लगा कि जैसे धर्मराज्य की स्थापना हो गई हो । प्रतापभानु इतना धार्मिक राजा, इतना महान चरित्र वाला व्यक्ति था । परन्तु जब यह कहा जाता है कि आगे चलकर वही रावण हो गया तो बड़ी निराशा होती है । किन्तु उस प्रसंग को ध्यान से पढ़ें तो एक बड़ा अनोखा संकेत सूत्र यह दिया गया है कि संसार में आज जो पक्षी दिखायी देते हैं उसमें कौए और हंस अलग-अलग दिखाई देते हैं । उनमें परिवर्तन करने का कोई उपाय नहीं है । कौआ, कौआ ही रहेगा और हंस, हंस ही । लेकिन मनुष्य के जीवन की विलक्षणता है कि उसमें परिवर्तन होता है । प्रतापभानु के जीवन में जब परिवर्तन हुआ तो उसको देखकर सब लोगों ने ब्रह्मा को दोष देते हुए यही कहा कि ब्रह्मा ने हंस का निर्माण करते-करते अचानक कौए का निर्माण कर दिया है । परन्तु ऐसा क्यों हो गया ? तो उसका जो चित्र गोस्वामीजी ने प्रस्तुत किया है, उसका भी सूत्र यही है कि प्रतापभानु मार्ग से भटक गया था ।
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