श्री रामचरितमानस में भगवान श्रीराघवेन्द्र की विविध यात्राओं का ऐसा उल्लेख किया गया है कि वे यात्राएँ केवल भूगोल की साधारण यात्रायें नहीं, वरन वे सबकी सब हमारे जीवन की यात्राएँ हैं । प्रभु ने विविध मार्गों पर चलकर हमारे समक्ष एक आदर्श उपस्थित किया और चुनाव के लिये हमें स्वतंत्रता दे दी कि हम इन मार्गों में से जिस मार्ग का स्वयं को अधिकारी समझें उस मार्ग पर चलकर अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने की चेष्टा करें । भगवान श्रीराघवेन्द्र की यात्रा का अभिप्राय यह है कि सर्वप्रथम हमारे जीवन में सही-सही लक्ष्य का निर्णय हो, उसके पश्चात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किस मार्ग का वरण करना है यह निर्णय करना होगा । उस मार्ग पर चलने की सही पद्धति तथा उस मार्ग में आने वाली समस्याओं आदि को पार करते हुए यदि हम जीवन पथ में आगे बढ़ें, तो इसमें कोई सन्देह नहीं है कि हम जीवन के लक्ष्य को पा लेंगे ।
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