भगवान कृष्ण भी शास्त्र को प्रमाण मानते हुए कहते हैं - तस्मन्च्छात्रं प्रमाणन्ते - और भगवान कृष्ण ने जो बात कही, भगवान राम के रूप में इन्होंने चरितार्थ करके दिखाया । क्योंकि भगवान श्रीराघवेन्द्र जब चारों विद्यार्थियों को आगे करके चले तो हम कह सकते हैं कि विद्यार्थियों के रूप में चारों वेद ही भगवान के आगे चल रहे हैं । वेदों के लिए एक वाक्य कहा गया है कि ये वेद जो हैं वे भगवान के निश्वास हैं । और भई ! जब हम और आप चलते हैं तो साँस हमारे आगे-आगे चलती है । और अगर यह प्रश्न किया जा कि भगवान के आगे कौन चलेगा ? तो इसका उत्तर यही दिया जायेगा कि वेद चलेंगे । इसलिए ये चारों विद्यार्थी आगे चलते हैं और भगवान उनके पीछे चलते हैं । पर इन चारों विद्यार्थियों को भगवान राम ने यमुना के किनारे से ही लौटा दिया । लेकिन क्यों लौटा दिये ? आइये, जरा इस पर भी विचार करें । भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि अर्जुन ! वेदों की अतुलित गरिमा होते हुए भी तुम्हें वेदों के ऊपर उठना है । भगवान ने कहा कि अन्त में वेद ज्ञान की भी एक सीमा है इसलिए व्यक्ति को उस वेद ज्ञान से ऊपर उठना चाहिए । इससे वेद की सीमा का कोई हनन नहीं होता ।
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