भगवान की कथा तो अनन्त है, इसको पूरा कर पाना सम्भव नहीं है, पर समय की सीमाओं में रहकर मैं बस इतना ही कहूँगा कि जनकनन्दिनी श्रीसीताजी, लक्ष्मण जी और भगवान श्रीराघवेन्द्र ने जीवन पथ के लिए जो सूत्र दिये उनका हमें जीवन पथ में चलते हुए सर्वदा स्मरण करते रहना चाहिए । और इनमें से चाहे जो पथ आप अपने लिये चुन लीजिए । गोस्वामीजी कहते हैं कि हम अपनी शक्ति का सही सदुपयोग अपने लिये तथा समाज के लिये करें, बस प्रभु की यात्रा का यही उद्देश्य है, और इस यात्रा पथ की कथा हमें और आपको अपने जीवनपथ को समझने में सहायता देगी ।
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