Monday, 1 May 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

समस्त धर्मग्रंथ ईश्वर की महिमा का वर्णन करते हैं । ईश्वर की भक्ति का उपदेश देते हैं । और सभी ईश्वर की ओर बढ़ने का मार्ग व्यक्ति को बताते हैं । और वे ग्रन्थ जो दावा करते हैं, वे किसी न किसी के लिए समान रूप से उपयोगी हैं । अब यहाँ विचारणीय प्रश्न यह है कि इन ग्रन्थों में प्रमुखता किस ग्रन्थ को दी गयी ? और तब गोस्वामीजी अपने अद्भुत शैली के माध्यम से दोनों पक्षों का निर्वाह कर रहे हैं । यदि केवल भौतिक पक्ष का निर्वाह करना होता तो चार विद्यार्थियों को भेजने का तुक समझ में नहीं आता । क्योंकि अगर किसी व्यक्ति को मार्ग दिखाना है, तो आप एक व्यक्ति को भेजेंगे । परन्तु यह चार शब्द बड़ा प्रतीकात्मक है । हमारी मान्यता है कि समस्त ग्रन्थों में परम प्रमाण चारों वेद ही हैं । वेद ही परम प्रामाणिक तथा अपौरुषेय हैं ।

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