कोमलता की परिभाषा करते हुए रामायण में कहा गया है कि वन जाने का समाचार जब भगवान राम को मिला तो श्रीराम मुस्कराने लगे । उन्हें रंचमात्र भी दुख नहीं हुआ । लेकिन दूसरी ओर जब प्रभु माँ की ओर देखते हैं, पिता जी की ओर देखते हैं, तो भगवान राम की आँखों में आसूँ आ गये । पढ़कर आश्चर्य होता है कि स्वयं की इतनी वस्तु खो गयी पर रंचमात्र दुखित नहीं हैं । इसका कारण क्या है ? तब गोस्वामीजी ने कहा - श्रीराम की कोमलता का एक नया ही रूप है । स्वयं अपने लिये तो वे इतने कठोर दिखायी देते हैं कि इतने बड़े आघात की झेलने में उन्हें रंचमात्र भी पीड़ा नहीं होती है । तुलसीदास जी ने कहा कि करुणामय भगवान श्रीराघवेन्द्र इतने कोमल हैं कि स्वयं अपने ऊपर बड़े से बड़े कष्ट को झेलकर भी किसी दूसरे का रंचमात्र भी दुख देख लें तो व्याकुल हो जाते हैं, और फिर तो प्रभु की आँखों से आँसू रुकते नहीं हैं ।
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