Monday, 29 May 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

श्रीसीताजी ने सुमन्त जी से कहा कि आप पिताजी से जाकर कह दीजियेगा कि मेरे सामने न तो भ्रम की समस्या है, न श्रम की समस्या और न दुख की समस्या है । और उसका सूत्र देते हुए श्रीसीताजी ने कहा कि भ्रम की समस्या तो उसके सामने होगी जिसे स्वयं यह निर्णय करना हो कि मुझे किधर जाना है ? पर यहाँ तो जब आगे-आगे प्रियतम चलेंगे तब फिर निर्णय तो इन्हीं को करना होगा । इसलिए मुझे भला भ्रम क्यों होगा । इसका अभिप्राय है कि जीवन पथ में कभी भ्रमित न हो इसका सर्वश्रेष्ठ उपाय यही है कि हम ईश्वर से प्रार्थना करें कि महाराज ! आप ऐसी कृपा करें कि मैं आपके पीछे-पीछे चलूँ । हम अपनी कामनाओं के पीछे प्रभु को चलाने की चेष्टा करने के स्थान पर प्रभु से यही प्रार्थना करें कि आप जिसे सही समझें, कृपा करके हमें उसी दिशा में ले चलें ।

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