Tuesday, 11 July 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

गोस्वामीजी ने संसार के थके हुए और जो दीन-हीन अवस्था में हैं, मन की समस्याओं से पीड़ित हैं उन सबको मन की शान्ति और विश्राम की प्राप्ति का सूत्र देते हुए निमंत्रण दिया कि जैसे वन में चारों ओर आग लग जाने पर जो सरोवर का आश्रय प्राप्त कर उसमें कूद पड़े तो वह जलने से बच जाता है, उसी प्रकार जो संसार के विषयों की दुख और चिन्ता की अग्नि में जल रहे हैं, वे यदि आकर इस 'मानस' के दिव्य, असीम और अथाह सरोवर में प्रवेश कर स्नान करेंगे तो इस ज्वाला से बच जाएँगे और उसके मन को विश्राम और सुख की प्राप्ति होगी । हमारा मन ही सभी समस्याओं का केन्द्र है और इस ग्रन्थ की विशेषता यही है कि मन से जुड़ी हुई समस्याओं का समाधान इसके माध्यम से हमें प्राप्त होता है ।

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