Friday, 28 July 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

गोस्वामीजी के जन्म के समय आनन्द-उल्लास के कोई चिन्ह दिखाई नहीं देते पर उस महापुरुष ने अनेकानेक जीवों के जीवन में आनन्द, उत्साह और उल्लास का संचार किया । गोस्वामीजी ने अपनी आत्मकथा जिस रूप में लिखी है उसमें उन्होंने अपने कुल, माता-पिता, जन्म स्थान आदि का वर्णन उस पद्धति से नहीं किया है जैसा कि अन्यत्र देखा जाता है । इसलिए उनके इस ग्रन्थ की तुलना चित्र से न करके 'दर्पण' से करना अधिक उपयुक्त होगा । हम जब किसी व्यक्ति के चित्र के सामने खड़े होते हैं तो उस व्यक्ति की आकृति और उसके मुख के भाव को देखते हैं, पर दर्पण की विशेषता यह है कि उसके सामने खड़े होने पर हम अपने आपको देखते हैं । गोस्वामीजी की आत्मकथा की विशेषता भी यही है कि हम सब उसमें अपने आपको देख सकते हैं । गोस्वामीजी के बारह ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं, पर उनमें से भी जिन दो ग्रन्थों का अधिक प्रचार है, वे हैं - 'रामचरितमानस' और 'विनय पत्रिका' । 'रामचरितमानस' तो रामकथा है और 'विनय पत्रिका' गोस्वामीजी की आत्मकथा है ।

No comments:

Post a Comment