जीवन में दुख तो आता ही है, पर 'क्यों आता है' यदि इस प्रश्न पर विचार किया जाय तो भिन्न-भिन्न दृष्टियाँ सामने आती हैं । कुछ लोगों को लगता है कि हमारे कर्मों के द्वारा ही जीवन में दुख आता है, अतः उसे भोगने से ही उससे छुट्टी मिल सकती है । पर यही प्रश्न यदि आप ज्योतिषी से कर दें तो वह यही कहेगा कि 'ग्रहों के कारण दुख-सुख आते हैं' । भूत-प्रेत को मानने वाले ओझा आदि किसी भूत, प्रेत व चुड़ैल का नाम लेकर कहेंगे कि वह विध्न-बाधा डाल रहा है । कई बार व्यक्ति दुख आने पर किसी अन्य व्यक्ति को दोष देता हुआ दिखाई देता है कि अमुक व्यक्ति ने हमारा काम बिगाड़ दिया । पर एक भक्त की दृष्टि सर्वथा भिन्न होती है । उसको इसमें भी भगवान की कृपा दिखाई देती है । ऐसी स्थिति में भी वह भगवान का स्मरण करता है । भगवान शंकर की भी यही दृष्टि है । मारीच के जीवन में भी हमें यही दृष्टि दिखाई देती है ।
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