'मानस' में बालि और रावण दोनों के जीवन में अहंकार दिखाई देता है । दोनों की पत्नियाँ उन्हें समझाने का यत्न करती हैं क्योंकि उनकी भावना भगवान राम के प्रति बड़ी ऊँची है । पर बालि और रावण दोनों ही इनकी उपेक्षा करते हैं । इन समानताओं के साथ-साथ बालि और रावण में एक मनोवैज्ञानिक अन्तर है । मानो ये अभिमान की दो वृत्तियाँ हैं । रावण का स्वभाव है कि जो भी बात उसके सामने की जाय वह उसे काट देता है । बालि की वृत्ति दूसरे प्रकार की है । वह सामनेवाले की बात का खण्डन नहीं करता, अपितु उससे भी ऊँची बात कर देता है यह दिखाने के लिए कि मैं तुमसे ज्यादा जानता हूँ । इस खण्डन-मण्डन में साध्य एकमात्र अपने अहंकार का प्रदर्शन ही है ।
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