हनुमानजी के प्रहार से लंकिनी को अपने पुराने इतिहास की स्मृति हो आती है । उसे ब्रह्माजी के वरदान की बात याद आ जाती है । लंकिनी लंका नगर की रक्षिका है । लंका पर पहले देवताओं का अधिकार था । बाद में उस पर राक्षसों ने बलपूर्वक अधिकार कर लिया । लंकिनी रावण के संग रहकर रावण के ही चिन्तन को सत्य मानने लगी । उसने रावण की सेवा को ही अपना धर्म मान लिया । पर अब वह कहने लगी कि जब ब्रह्मा के द्वारा मुझे ज्ञात हुआ कि भविष्य में लंका पर राक्षसों का शासन होगा तो मैं दुखी हो गई । ब्रह्माजी ने मुझे दुखी देखकर सांत्वना देते हुए कहा कि यह स्थिति सदा नहीं रहेगी, उसमें परिवर्तन होगा । मैंने पूछा कि उस बदलाव का ज्ञान मुझे कैसे होगा ? तब ब्रह्माजी ने एक सूत्र दिया कि तुम कपि के प्रहार से व्याकुल हो जाओगी, तब राक्षसों का विनाश हो जाएगा । यह 'व्याकुलता' बड़ी महत्वपूर्ण है । क्योंकि समाज में या व्यक्ति में परिवर्तन तभी होगा कि जब उनमें परिवर्तन के लिए व्याकुलता उत्पन्न होगी ।
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