Monday, 4 September 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

रामचरितमानस में वर्णन आता है कि बालि ने जब भगवान राम से पूछा कि आपने मुझे छिपकर क्यों मारा ? तो भगवान राम ने मुस्कराकर बालि से पूछा कि तुम मुझे मनुष्य मानते हो कि ईश्वर मानते हो ? बालि ने कहा - महाराज ! मैं तो आपको ईश्वर मानता हूँ । भगवान बोले - ईश्वर मानते हो तो तुमको प्रश्न पूछना ही नहीं चाहिए । - क्यों ? भगवान राम बोले - आज तक ईश्वर ने किसी को सामने आकर मारा है क्या ? ईश्वर जब मारता है छिपकर ही मारता है । इसलिए भगवान राम ने बालि को वृक्ष की आड़ में छिपकर मारा, यह कहकर उन्हें दोष देना उचित नहीं है । क्योंकि ईश्वर तो कभी सामने आता ही नहीं, व्यक्ति के कर्म ही सामने आते हैं । कर्म के आड़ से ही काल का बाण नित्य चल रहा है । इतने व्यक्ति निरन्तर मर रहे हैं पर क्या यह पता चलता है कि किसने मारा ? तो क्या इस पर ईश्वर से प्रश्न करना उचित है कि आपने मुझे क्यों मारा ? हाँ, यदि यह प्रश्न उठे कि 'आखिर इस काल का समाधान क्या है' तो यह उचित है ।

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