हनुमानजी कौन हैं और उनके प्रहार का क्या अर्थ है, यह बताते हुए गोस्वामीजी कहते हैं कि हनुमानजी प्रबल वैराग्य हैं । इसका अर्थ है कि जब व्यक्ति राग और आसक्ति के कारण सत्याचरण से वंचित हो जाता है, उस समय संत के रूप में, वैराग्य के रूप में हनुमानजी-जैसा कोई भक्त आता है जो उसकी मान्यता पर प्रहार करता है जिससे वह व्यक्ति व्याकुल हो जाता है । और यदि उसे इस व्याकुलता से सत्य का ज्ञान हो जाता है तो वह धन्य हो जाता है । पर बहुधा यही देखा जाता है बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जो प्रहार से व्याकुल होते हैं ।
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