गोस्वामीजी जब यह कहते हैं कि नारी का सौंदर्य एक दीपशिखा की भाँति है तो यह नारी की निन्दा नहीं है । किस घर में अँधेरे को दूर करने के लिए दिया नहीं जलाया जाता ? क्या 'दिए' के बिना किसी घर का कार्य चल सकता है ? निन्दनीय तो वह पतंगा है जो दीपक से प्रकाश न लेकर, उस पर गिरकर स्वयं जल जाता है और कभी-कभी तो दिए को भी बुझा देता है ।
No comments:
Post a Comment