एक ओर तो गोस्वामीजी ममता की निन्दा करते हैं और दूसरी ओर वे यह भी कहते हैं कि 'भगवान राम में ममता बहुत है' । वे कहते हैं कि अयोध्यावासियों पर प्रभु की बड़ी ममता है । पूछा जा सकता है कि ममता निन्दनीय है या प्रशंसनीय है ? इसका उत्तर यही है कि संसार की ममता हमें बाँधती है पर भगवान की ममता से हम बन्धन से छूट जाते हैं और भगवान बन्धन में बँध जाते हैं । ऐसी विलक्षण ममता भगवान से पाकर जीव धन्य हो जाता है । गोस्वामीजी ने इस ममता का अनुभव किया, इसलिए वे कहते हैं कि संसार के ममता के स्थान पर राम से या परोपकार से ममता जीवन को धन्य बना देती है ।
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