Saturday, 16 September 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

एक ओर तो गोस्वामीजी ममता की निन्दा करते हैं और दूसरी ओर वे यह भी कहते हैं कि 'भगवान राम में ममता बहुत है' । वे कहते हैं कि अयोध्यावासियों पर प्रभु की बड़ी ममता है । पूछा जा सकता है कि ममता निन्दनीय है या प्रशंसनीय है ? इसका उत्तर यही है कि संसार की ममता हमें बाँधती है पर भगवान की ममता से हम बन्धन से छूट जाते हैं और भगवान बन्धन में बँध जाते हैं । ऐसी विलक्षण ममता भगवान से पाकर जीव धन्य हो जाता है । गोस्वामीजी ने इस ममता का अनुभव किया, इसलिए वे कहते हैं कि संसार के ममता के स्थान पर राम से या परोपकार से ममता जीवन को धन्य बना देती है ।

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