Thursday, 21 September 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

कहा जाता है कि गोस्वामीजी को पत्नी ने फटकार दिया और वे सन्त बन गए । पर यह कहना न तो न्याय-संगत है और न ही ठीक है । संसार में न जाने कितने व्यक्तियों को पारिवारिक जीवन में भर्त्सना और आलोचना सुनने को मिलती है पर वे सबके सब तुलसीदास नहीं बन जाते । तुलसीदास, तुलसीदासजी इसलिए बन गए क्योंकि उनके गुरुदेव ने बाल्यावस्था में उन्हें रामकथा सुनाकर, रामभक्ति के संस्कार, बीज रूप में उनके अन्तःकरण में डाल दिए थे । गुरुदेव ने बार-बार उन्हें जो रामकथा सुनाई - वह उनके अन्तःकरण में विद्यमान थी । उनके जीवन में ऐसा अवसर आया कि लगा कि वे वासना की, भोग की नदी में पूरी तरह डूब चुके हैं । पत्नी के प्रति वे इतने आसक्त थे कि एक दिन भी उनके बिना वे रह नहीं पाते । वे पागलों की भाँति उनके पास दौड़े चले जाते हैं जहाँ उन्हें फटकार मिलती है । उसके बाद उनमें जो परिवर्तन दिखाई देता है उसे हम पत्नी की फटकार से जोड़ देते हैं । पर वस्तुतः उस फटकार का परिणाम यह होता है कि उनके भीतर गुरुदेव से सुनी रामकथा के बीज से उसका अंकुर फुट पड़ता है । गोस्वामीजी ने जो बाल्यावस्था में सुना था, इसका बड़ा महत्व है । उससे न केवल उन्हें अपितु समाज को भी बड़ा लाभ हुआ और आज भी हो रहा है ।

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