लंकिनी ने पहले हनुमानजी को चोर कहा पर बाद में वह कहने लगी कि पहले मैं सोचती थी कि लंका का स्वामी, राजा रावण है पर अब मैं समझ गई कि इसके असली स्वामी तो भगवान राम हैं । लंकिनी सत्य को समझ लेती है जिनके सत्संग के प्रभाव से, ऐसे महान धर्मज्ञ हनुमानजी ने जब अशोकवाटिका के फल बिना रावण की आज्ञा के खा लिए, तो इसके पीछे उनका यही तत्वज्ञान था । रावण ने भी उनसे यही कहा था कि मेरी आज्ञा के बिना मेरे बाग के फल खाना तो चोरी है । तो मानो विस्तार से उत्तर देते हुए उन्होंने यही स्पष्ट किया कि यह बाग तुम्हारा नहीं है और जिनकी आज्ञा लेनी चाहिए, उनकी अनुमति से ही मैंने फल खाए हैं । हनुमानजी जानते हैं कि श्रीसीताजी प्रभु की आदिशक्ति हैं, जिन्होंने सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण किया है । वे जगत् जननी हैं । माँ की आज्ञा लेकर फल खाने के पीछे उनका यही दर्शन और ज्ञान है ।
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