गुण और दोष के विषय में मानस में बड़ा ही तथ्यपूर्ण विश्लेषण किया गया है । पुरुष की समस्या है उसका 'मैं' और नारी की समस्या है उसकी 'ममता' । पुरुष शब्द से ही ऐसा ध्वनित होता है कि जैसे वह पुरुषार्थ और शक्ति से संबद्ध है । नारी 'गर्भ' में सन्तान को रखती है, जन्म देती है, उसके लिए अनेक कष्ट उठाती है, उसका लालन-पालन करती है, अतः स्वाभाविक रूप से उसके जीवन में ममता बहुत है । पर यदि हम 'अहं' और 'मम' इन दोनों का उपयोग सही अर्थों में करें तो ये समस्या के स्थान पर कल्याणकारी भी हो सकते हैं ।
No comments:
Post a Comment