अवध में अनेक सन्त ऐसे हैं जो यह नहीं मानते कि गोस्वामीजी ने विवाह किया था । वे सोचते हैं कि यह मान लेने पर कि गोस्वामीजी ने विवाह किया था उनका स्थान इतना ऊँचा नहीं रह जायेगा । उन सन्तों का यही आग्रह है कि गोस्वामीजी बाल-ब्रह्मचारी थे । गोस्वामीजी तो महान थे ही, पर वे बाल-ब्रह्मचारी थे इसलिए महान थे अथवा वे जन्मजात महान थे, यह सिद्ध करने की चेष्टा करने का कोई बहुत महत्व नहीं है । क्या विवाह करके वे महान नहीं रह जायेंगे ? वस्तुतः बाल-ब्रह्मचारी या जन्मजात महान सिद्ध करने से वे हमारे लिए उतने आदर्श नहीं होंगे जितना यह जानकर कि गोस्वामीजी हम लोगों के बीच थे और हम लोगों जैसे ही थे । उन्होंने भी हम लोगों के जीवन में जैसी समस्याएँ आती हैं उनका अनुभव किया और उनका समाधान ढूँढ़ा । गोस्वामीजी ने अपने ग्रन्थों में इसका वर्णन किया है । और वे स्वीकार करते हैं कि सचमुच उनके जीवन में यह अवसर आया ।
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