गोस्वामीजी की पत्नी के विषय में एक विद्वान प्राध्यापक ने अपने विचार व्यक्त किए हैं । तुलसीदासजी पर उन्होंने जो ग्रन्थ लिखा है उसमें वे कहते हैं कि तुलसीदास की पत्नी बड़ी कर्कशा स्वभाव की थी इसीलिए तुलसीदासजी के जीवन में उनके प्रति विरोध की भावना उत्पन्न हो गई थी । और इसीलिए उनके ग्रन्थों में भी स्त्रियों की निन्दा और विरोध की जो बात दिखाई देती है, इसके मूल में उनकी पत्नी का स्वभाव ही एकमात्र कारण है । पर ऐसा कहना तो गोस्वामीजी के साथ न्याय नहीं है । ऐसी बात तो गोस्वामीजी को नहीं समझ पाने के कारण ही कही जा सकती है । गोस्वामीजी न तो नारी-निन्दक हैं और न ही उन्हें नारी जाति के प्रति कोई विरोध ही है । उनके ग्रन्थों में जहाँ एक ओर नारी-निन्दा के शब्द मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर नारी के संबंध में ऊँचे से ऊँचे भावपूर्ण शब्द भी मिलेंगे । सत्य तो यह है कि पुरुष हो अथवा नारी हो, दोनों में गुण और दोष दोनों ही विद्यमान होते हैं ।
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