रामायण में कथा आपने सुनी होगी - इन्द्र ने भगवान राम के लिए रथ कब भेजा ? जब कुम्भकर्ण मारा गया, मेघनाद मारा गया, बड़े-बड़े योद्धा मारे गए और रावण से भगवान की पहले दिन की लड़ाई समाप्त हो गई, तब कहीं जाकर इन्द्र ने रथ भेजा । इतना विलम्ब करने के पीछे इन्द्र का मनोविज्ञान क्या है ? वही अभिमान और संशय । इन दोनों से मुक्ति पाना बड़ा कठिन है । ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास हो जाए, रंचमात्र संशय न रह जाए, अभिमान न रह जाए । इसी अभिमान और संशय के कारण इन्द्र रथ भेजने में विलम्ब करते हैं । संशय क्या है ? इन्द्र स्वर्ग में बैठे निरन्तर युद्ध को देख रहे हैं । राम और रावण का युद्ध चल रहा है, पर अभी तक इन्द्र को राम की महिमा पर पूरी आस्था नहीं है । युद्ध में तरह-तरह के उतार-चढ़ाव आते देखकर इन्द्र को लगता है कि कहीं रावण ही तो नहीं जीत जाएगा ? ऐसा न हो कि हम रथ भेज दें और रावण बाद में हमारी खबर ले कि अच्छा, तुमने रथ भेजा था ? जब देख लिया कि अब तो निश्चित रूप से श्रीराम की विजय हो रही है और वे ऐसे भी जीत ही जाएँगे, तब सोचने लगे कि अब यदि रथ नहीं भेजेंगे तो कहने को हो जाएगा कि इस महान युद्ध में इन्द्र ने भगवान को कोई सहयोग नहीं दिया ।
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