Monday, 4 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

ब्रह्मा ने देवताओं को आदेश दिया कि आप लोग वानर के रूप में जन्म लेकर भक्तिपूर्वक भगवान की प्रतीक्षा करें और जब वे आकर लंका पर चढ़ाई करें, तो उनके पीछे चलते हुए युद्ध करें । लंका में भगवान की विजय होगी । साधना का भी यही क्रम है । सत्कर्म में जो अभाव है, उसे दूर करने के लिए हम भगवान से प्रार्थना करें । उनकी कृपा पाने के लिए हम साधना करते हुए निरन्तर भगवान की प्रतीक्षा करते रहें । सबसे अनोखे तो हनुमानजी निकले । उन्होंने स्वयं रावण या कुम्भकर्ण से युद्ध नहीं किया । उनकी शक्ति और सामर्थ्य का वर्णन पढ़कर तो लगता है कि हनुमानजी के जैसा बलवान तो कोई था ही नहीं । पर उनके चरित्र का तत्व क्या है ? वे अपने बल का उपयोग तभी करते हैं, जब प्रभु मिल जाते हैं और जब वे उन्हें यह काम सौंपते हैं । अभिप्राय यह कि हनुमानजी भगवत्प्राप्ति के बाद भगवान के यन्त्र के रूप में, भगवान जैसी प्रेरणा देते हैं, उसी रूप में महान कार्य सम्पन्न करते हैं ।

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