जिन तत्वों के कारण देवताओं की निन्दा और प्रशंसा की गई है, वे ही तत्व इन्द्र के अंश से जन्मे बालि में भी है । अभिमान तथा प्रदर्शन की वृत्ति के कारण ही वह रावण से युद्ध कर उसे पराजित करता है और उसे बगल में दबाए हुए सारे संसार में घूमता रहता है । क्या उसे ब्रह्मा की बात याद नहीं थी कि भगवान अवतार लेंगे ? बिल्कुल याद थी । रामायण में आप पढ़ते हैं कि तारा के रोकने पर बालि ने कहा था कि राम साक्षात भगवान हैं । इसका अर्थ है कि बालि को पता था कि भगवान अवतार लेंगे । लेकिन भगवान के अवतार के पहले ही रावण को हराने में भी उसकी वही अभिमान की वृत्ति थी कि ब्रह्माजी ने कहा है कि श्रीराम के साथ जाकर रावण को हराना, पर यदि मैं श्रीराम के साथ जाकर रावण को हरा भी दूँगा, तो कीर्ति तो राम की ही होगी, हमें कोई विजेता मानेगा नहीं । दूसरी ओर भगवान अपनी कीर्ति को बाँटने के लिए इतने व्यग्र हैं कि युद्ध समाप्त होते ही वे बन्दरों से कहते हैं कि तुम्हारे बल से ही मैं रावण को मार सका ।
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