......कल का शेष.....
लेकिन कुछ पात्रों के जीवन में सीढ़ी का मार्ग नहीं दिखाई देता । किन्हीं पात्रों के जीवन में हमें ऐसा दिखाई देता है, जिसे हम छलाँग का मार्ग कह सकते हैं । छलाँग का मार्ग कहने का अभिप्राय यह है कि कुछ लोग ऐसे विलक्षण होते हैं, जो सीढ़ी की क्रमिक साधना से न चलकर, ऐसी छलाँग लगाते हैं कि एक छलाँग में ही वे ऊपर दिखाई देने लगते हैं । यदि हम बालि और सुग्रीव के चरित्र की तुलना करें, तो हम यही कहेंगे कि सुग्रीव के चरित्र में तो क्रमिक विकास है, वे सीढ़ी के मार्ग से ऊपर चढ़ते हैं, पर बालि के चरित्र में विशेषता यह है कि प्रारंभ में तो वह एकदम नीचे दिखाई देता है, पर जब उसने छलाँग लगाई, तो एक बार में ही वह इतना ऊपर पहुँच जाता है जहाँ तक पहुँचने में सुग्रीव को काफी समय लग जाता, परन्तु ध्यान रहे, यह छलाँग वाला मार्ग कोई ऐसा मार्ग नहीं है, जिसके लिए किसी को उत्साहित करना उचित हो । वस्तुतः मार्ग का जब वर्णन किया जाएगा, तो सोपानवाले मार्ग का ही वर्णन होगा । परन्तु आप इतिहास को उठाकर पढ़िए, पुराणों को पढ़िए, मानस के पात्रों को देखिए, तो पाएँगे कि कुछ ऐसे भी पात्र अवश्य हैं, जिनके जीवन में छलाँग है ।
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