मानस में अंगद के सन्दर्भ में जितनी भी पंक्तियाँ आई हैं, उन सबमें यह बात आपको स्पष्ट दिखेगी कि अंगद के लिए जिस शब्द का सर्वाधिक प्रयोग किया गया है, वह है 'बालितनय' । यह बात अपने आप में कुछ विचित्र-सी प्रतीत होती है, क्योंकि परंपरा यह है कि जब हम किसी व्यक्ति का स्मरण किसी प्रसंग में करते हैं, तो यदि उसकी निन्दा या आलोचना करनी हो तो उसका संबंध हम ऐसे व्यक्ति से जोड़ते हैं, जो बुरा हो और जब किसी व्यक्ति की प्रशंसा करना चाहते हैं, तो उसका संबंध किसी श्रेष्ठ व्यक्ति से जोड़ते हैं । मानस में भी इसी पद्धति का प्रयोग किया गया है । ऐसी स्थिति में बालितनय के रूप में अंगद का परिचय दिया जाना, एक प्रश्न उपस्थित करता है कि बालितनय कहना अंगद की प्रशंसा है या निन्दा ? इसका उत्तर जानने के लिए हमें बालि के चरित्र पर विचार करना होगा ।
No comments:
Post a Comment