Tuesday, 26 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

समुद्र तट पर भगवान राम के समक्ष पार जाने को लेकर दो मत सामने आते हैं । समस्या यह थी कि समुद्र को कैसे पार किया जाय ? उसे पार करने का एक उपाय तो विभीषण बताते हैं । वे कहते हैं कि समुद्र से प्रार्थना कीजिए । और दूसरा उपाय श्रीराम के अनुज लक्ष्मणजी सुझाते हैं कि प्रभु ! आपके बाण में अपार शक्ति है, धनुष और बाण चढ़ाइये और समुद्र को सुखा दीजिए । पर अन्त में जब समुद्र सामने आता है, तो वह भगवान से अनुरोध करता है कि प्रभो, यदि आप सुखाकर चले जाएँगे, तो उससे आपका चमत्कार तो प्रकट हो जाएगा, पर आपके अवतार का उद्देश्य केवल महिमा प्रगट करना तो है नहीं, आपका उद्देश्य हर व्यक्ति को ऐसा प्रशस्त पथ देना है, साधना की ऐसी क्रमिक पद्धति देनी है, जिससे हर व्यक्ति उस सत्य तक पहुँच सके, जिस तक कोई बिरले ही महापुरुष छलाँग लगाकर पहुँच पाते हैं । अतः अनगिनत बन्दरों को साथ लेकर चलने का मार्ग तो सेतु का ही मार्ग हो सकता है ।

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