Friday, 22 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

मानस में बालि निन्दनीय है या वन्दनीय ? वह अच्छा पात्र है या बुरा ? सामान्यतः हमारे मन में यही धारणा आती है कि बालि बुरा पात्र है और इसकी पुष्टि इस बात से हो जाती है कि भगवान ने बालि पर बाण से प्रहार किया । केवल प्रहार ही नहीं, बल्कि कठोर-से-कठोर शब्दों में उसकी भर्त्सना भी की, उस पर अनेक आरोप लगाए । उन आरोपों से तो यही लगता है कि बालि निन्दनीय पात्र है । लेकिन अंगद का परिचय जब भी दिया गया, बालितनय के रूप में दिया गया, पर एक भी प्रसंग ऐसा नहीं है, जहाँ उन्हें बालितनय कहकर उन पर कटाक्ष किया गया हो या उसके निन्दनीय पक्ष की ओर संकेत किया गया हो । बालितनय कहकर सदा उनकी प्रशंसा की गई और यह शब्द प्रभु को इतना प्रिय था कि जब वे अंगद को कुछ कहना चाहते थे, तो वे उन्हें अंगद की जगह बड़े स्नेह से बालितनय ही कहते थे । अंगद की प्रशंसा के हर प्रसंग में जब उनका स्मरण बालि के पुत्र के रूप में किया गया, तो इसमें आध्यात्मिक साधना का बड़ा ही सार्थक संकेत है ।

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