Sunday, 31 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

सेतुबन्ध में दूसरी ओर जलचरों के साथ समस्या यह है कि ये मनुष्य को खा जानेवाले हैं । जीवन के दुर्गुण-विचार ही ये जलचर हैं । लक्ष्मणजी ने कहा था, प्रभो, आप समुद्र को सुखा दीजिए । यदि समुद्र सूख जाता तो उसके सारे जलचर भी मर जाते, पर समुद्र ने भगवान से कहा कि प्रभो ! इसमें कोई संदेह नहीं कि लक्ष्मणजी जैसे महापुरुष दुर्गुणों को क्षणभर में जलाकर नष्ट कर सकते हैं, परन्तु आप तो सब पर कृपा करने हेतु आये हुए हैं; तो क्या इन दुर्गुणों का भी सदुपयोग नहीं करेंगे ? और सचमुच भगवान इन दुर्गुणों का भी कितना सार्थक उपयोग करते हैं । अन्त में जब भगवान उस सेतुबन्ध पर खड़े हुए, तो समुद्र से निकले हुए जलचर भगवान का सौन्दर्य देखने लगे । इसका सांकेतिक अभिप्राय यह है कि सद्गुणों को जोड़िये और दुर्गुणों को ईश्वर की ओर मोड़िये । हमारे जीवन में राग है । ये राग मानो जलचर हैं । इन्हें प्रभु की ओर मोड़ देना चाहिए ।

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