Wednesday, 13 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

भगवान राम ने जब रामेश्वर में भगवान शंकर की मूर्ति स्थापित करके पूजा की, तो पार्वती ने पूछा कि महाराज, रावण की पूजा लेने तो आप लंका चले जाते हैं, लेकिन भगवान राम ने पूजा की, तो आप पूजा लेने नहीं गए और उन्हें मूर्ति बनाकर पूजा करनी पड़ी । रावण चैतन्य की पूजा करता है और श्रीराम को जड़ मूर्ति की पूजा करनी पड़ी । यह क्या बात है ? शंकरजी ने हँसकर कहा कि पार्वती तुम समझी नहीं । रावण तो मुझ चैतन्य को देखकर भी चैतन्य रूप में नहीं देख पाता, लेकिन हमारे प्रभु तो इतने बड़े हैं कि वे जिस पत्थर को छू दें, वही शंकर बन जाता है । उन्हें मेरी जरूरत नहीं है, वे तो जिस कण को स्पर्श कर देंगे, वही शंकर हो जायेगा ।

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