सेतुबन्ध में पहले पत्थर का पुल बनाया । यह सद्गुणों के द्वारा बनाया जाने वाला पुल है । यहाँ सद्गुणों के साथ जो समस्या है, वह सेतुबन्ध के सामने भी आई । पत्थर में दृढ़ता तो खूब है, पर वे उतने ही अधिक भारी भी हैं । जल में डालते ही डूब जाते हैं और केवल स्वयं ही नहीं बल्कि अपने साथ बँधने वाले को भी डुबा देते हैं । सद्गुण के साथ दो समस्याएँ थी । एक तो ये हल्के कैसे हों और दूसरी कि ये जुड़ें कैसे ? नल-नील ने छू दिया तो हल्के हो गए, पर जब उन्हें जल में डाला गया तो वे तरंगों के कारण एक-दूसरे से अलग हो गए । अब जब जोड़ने की बात आई तो हनुमानजी आगे आए । वे बोले कि एक पत्थर पर *रा* लिखो और दूसरे पर *म*, बस पत्थर जुड़ जाएँगे । ऐसा ही किया गया, पत्थर जुड़ गए और इस प्रकार निर्मित पुल से होकर बन्दरों ने समुद्र पार किया । सद्गुणों के संदर्भ में इसका अभिप्राय यह है कि हमारे जीवन में सद्गुणों के साथ दो समस्याएँ आती हैं, जिनमें एक तो है अभिमान की ।
....शेष कल ....
....शेष कल ....
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