रामायण में जो कहा गया कि सारे संसार में रावण का राज्य था, तो इसका अभिप्राय क्या है ? यह कि जीवनभर हम मोह के शासन में रहें और घण्टे भर के लिए मोह से मुक्त हों, तो उसे मोह का राज्य ही तो कहा जाएगा । अब आप कथा में आए हुए हैं, तो यही मानना होगा कि इस समय आप मोह से मुक्त हैं, पर प्रश्न है कि मोह मिट चुका है या दबा हुआ है ? ज्योंही हम कथा से उठकर जाते हैं, वह फिर हम पर सवार हो जाता है, भले ही वह बगल में दबा हुआ चला जाए । *"बिनु सत्संग न हरिकथा तेहि बिनु मोह न भाग"*। सत्संग में मोह भागता तो है, पर मरता नहीं । इसलिए मानस में बहुकाल शब्द भी जोड़ दिया गया । सत्संग से कुछ समय के लिए तो मोह भागेगा, पर वह न जाने कब लौट आए । दीर्घकाल तक सत्संग करने से ही मोह भंग होगा - *तबहिं होइ सब संसय भंगा । जब बहुकाल करिय सत्संगा ।।*
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