भगवान के अवतार का उद्देश्य क्या है ? अकेले व्यक्ति की साधना का सत्य तो ऐसा हो सकता है कि वह ऐसी अतुलनीय सामर्थ्य रखता हो कि एक ही छलाँग में परमार्थ को प्राप्त कर ले, पर यदि उसे हजारों लोगों को साथ लेकर चलना हो, तो यदि वह व्यक्ति छलाँग मार्ग से अपने पराक्रम का प्रदर्शन करे तो इसमें उसकी महिमा तो दिखाई देगी, पर बेचारे अन्य चलने वाले लोग उस गति के साथ चलने में असमर्थ हो जाएँगे । इसलिए महापुरुष जब चलते हैं, तो अपनी चाल से नहीं चलते ! जिन लोगों को लेकर चलना है, उनकी जितनी क्षमता है, उसके अनुकूल चलते हैं । स्वयं भगवान राम का जो मार्ग है, वह पैदल मार्ग है और सारे बन्दरों को साथ लेकर चलने का मार्ग है ।
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