Thursday, 14 December 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में इन्द्र की पूजा बन्द कराकर गिरिराज गोवर्धन की पूजा के लिए ब्रजवासियों को कहा । इन्द्र भी भगवान शंकर की तरह यह अर्थ ले सकते थे कि भगवान जिसकी पूजा करना चाहें, वह पूज्य हो जाता है, परन्तु अभिमान के कारण वे क्रोध में भरकर सारे ब्रज को नष्ट करने पर तुल गए । उन्होंने सारे मेघों को आज्ञा दी कि घोर वर्षा करके ब्रज को डुबो दो । तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन धारण कर ब्रज की रक्षा की । भगवान ने अपनी कनिष्ठिका अँगुली पर गोवर्धन को उठाया, पर ग्वाल-बालों से कहा कि तुम लोग भी अपनी लाठियाँ और अपने-अपने हाथ लगा दो । यह साधन और कृपा का सामंजस्य है । भगवान के ऊपर विश्वास के साथ-साथ भगवान के आदेश से स्वयं भी सेवा कार्य करना ।

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