........कल से आगे..........
लक्ष्मण और इन्द्र के संदर्भ में बड़ी प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया गया है। भगवान राम विष्णु के अवतार हैं। लक्ष्मणजी ने उन्हें बड़े भाई के रूप में देखा और उन्हें आगे करके चल रहे हैं, परन्तु भगवान ने जब इन्द्र से पूछा तो उन्होंने कहा कि आप मेरे छोटे भाई बनिए ! क्यों ? इन्द्र स्वर्ग का राजा है, भोगी है और लक्ष्मणजी मूर्तिमान वैराग्य हैं। इसका तात्त्विक तात्पर्य यह है कि जो वैराग्यवान है, वह भगवान के पीछे चलता है, पर जो भोगी है, वह तो ईश्वर को पीछे ही रखता है। उसे यही चिन्ता रहती है कि भगवान यदि बड़े भाई बन गये तो उनकी बात माननी पड़ेगी और छोटे भाई बने रहेंगे तो उन्हें हमारे पीछे आना पड़ेगा, हम जो कहेंगे उसे मानना पड़ेगा। हम ईश्वर की बात नहीं मानना चाहते, ईश्वर के पीछे चलना नहीं चाहते। हम तो ईश्वर को अपने छोटे भाई की तरह पीछे-पीछे आने के लिए, हम जो कहें उसे मानने के लिए कहते हैं।
लक्ष्मण और इन्द्र के संदर्भ में बड़ी प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया गया है। भगवान राम विष्णु के अवतार हैं। लक्ष्मणजी ने उन्हें बड़े भाई के रूप में देखा और उन्हें आगे करके चल रहे हैं, परन्तु भगवान ने जब इन्द्र से पूछा तो उन्होंने कहा कि आप मेरे छोटे भाई बनिए ! क्यों ? इन्द्र स्वर्ग का राजा है, भोगी है और लक्ष्मणजी मूर्तिमान वैराग्य हैं। इसका तात्त्विक तात्पर्य यह है कि जो वैराग्यवान है, वह भगवान के पीछे चलता है, पर जो भोगी है, वह तो ईश्वर को पीछे ही रखता है। उसे यही चिन्ता रहती है कि भगवान यदि बड़े भाई बन गये तो उनकी बात माननी पड़ेगी और छोटे भाई बने रहेंगे तो उन्हें हमारे पीछे आना पड़ेगा, हम जो कहेंगे उसे मानना पड़ेगा। हम ईश्वर की बात नहीं मानना चाहते, ईश्वर के पीछे चलना नहीं चाहते। हम तो ईश्वर को अपने छोटे भाई की तरह पीछे-पीछे आने के लिए, हम जो कहें उसे मानने के लिए कहते हैं।
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