Friday, 9 October 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्..............

भक्तिशास्त्र के अनुसार मन ही व्यक्ति की समस्या है - मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। मन ही केन्द्र है। इसलिए भक्त कहते हैं कि मन का पुनर्निर्माण हो। इसे चाहे रोग कह लीजिए, चाहे राक्षस कह लीजिए, चाहे दुर्गुण-दुर्विचार कह लीजिए और चाहे अवस्था। रामचरितमानस में सभी केन्द्रों का उत्तर दिया गया है। मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार सभी का समाधान दिया गया है और अन्त में मन के रोगों का विश्लेषण करते हुए यह कहा गया कि आयुर्वेद की पद्धति से जैसे शरीर के रोगों का विश्लेषण किया जाता है तथा उसे मिटाने की चेष्टा की जाती है, उसी तरह से मन के रोगों का भी विश्लेषण करके उसे भिन्न पध्दतियों से मिटाने का प्रयत्न किया जाता है।

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