Thursday, 22 October 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

ईश्वर परिणाम में सम है, पर व्यवहार में भक्तों का पक्ष लेते हुए दिखाई देता है। बालि और सुग्रीव के संदर्भ में भी यही बात है। भगवान भक्त का अर्थात सुग्रीव का पक्ष लेते हैं और बालि का वध करते हैं, पर अगर परिणाम की दृष्टि से देखें तो गोस्वामीजी कहते हैं कि परिणाम दोनों का समान है। कैसे ? यहाँ पर भगवान की बड़ी विचित्र भूमिका है। दो भाइयों बालि और सुग्रीव के बीच झगड़ा है। अब इसमें भगवान राम की भूमिका क्या है ? वे किष्किन्धा का राज्य बालि से छीनकर सुग्रीव को दे देते हैं। और बालि को ? - राम बालि निज धाम पठावा। - भगवान राम ने बालि को अपना धाम दे दिया। व्यवहार में पक्षपात दिखाई देते हुए भी, एक के गले में माला और दूसरे के छाती पर प्रहार दिखाई देते हुए भी, परिणाम दोनों के जीवन में समान है। एक को मीठी दवा और एक को कड़वी दवा, पर परिणाम की दृष्टि से दोनों के प्रति कल्याण की भावना है। सुग्रीव को किष्किन्धा का राज्य प्राप्त होता है, तो बालि को अपना धाम प्रदान कर वे पक्षपात और समता दोनों का निर्वाह करते हैं।

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