Monday, 19 October 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

पहला सूत्र है आगे राम और दूसरा है सभीता। जनकनन्दिनी सीताजी और लक्ष्मण, दोनों भगवान राम के पीछे चलते हैं और दोनों अत्यंत डरे हुए हैं। यह बड़ी विलक्षणता है। जनकनन्दिनी श्रीसीता का श्रीराम से डरना तो स्वाभाविक लगता है। वे भक्ति हैं। वे चलती हुई एक-एक पग डरती हुई रखती हैं कि कहीं ऐसा न हो कि श्रीराम के चरणचिह्नों पर मेरे पाँव पड़ जायँ और वे मिट जायँ, पर लक्ष्मणजी तो दोहरे डरे हुए हैं। सीताजी तो केवल श्रीराम के चरणचिह्नों को बचाकर चल रही हैं, लेकिन लक्ष्मणजी के सामने तो दो के चरणचिह्न हैं और उन्हें उन दोनों को बचाने की चिन्ता लगी है। वे दोनों को बचाते हुए सभीत और सजग भाव से चल रहे हैं। सीताजी महाशक्ति हैं और लक्ष्मणजी शेष हैं अर्थात कालतत्व। ये दोनों भगवान राम से क्यों डरते हैं ? एक बार भगवान श्रीराम ने लक्ष्मणजी से पूछ दिया - लक्ष्मण ! तुम तो शेष हो, अनन्त काल हो, तुम मुझसे क्यों डरते हो ? लक्ष्मणजी ने कहा कि महाराज ! मैं चाहता हूँ कि लोग समझ लें कि मैं अनन्त शेष होकर भी ईश्वर से डरता हूँ। जब मुझे ही ईश्वर से डर लगता है, तो आप सामान्य लोग ईश्वर से निर्भय रहें, यह मर्यादा का संरक्षण नहीं है। ईश्वर के पद-चिह्नों का संरक्षण अर्थात मर्यादा का संरक्षण।

No comments:

Post a Comment