Wednesday, 25 November 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्............

प्रभु तो रावण जैसे लोगों से भी अपना काम करा लेते हैं। रावण को हनुमानजी के पूँछ नष्ट करने का क्या उपाय सूझा - पहले इसकी पूँछ में कपड़ा लपेटो, फिर घी-तेल डालो और आग लगा दो। हनुमानजी ने प्रभु को मन ही मन प्रणाम किया और कहा कि त्रिजटा का स्वप्न ही सत्य है। लंका जलाने की योजना प्रभु की ही है और प्रबंध तो उनका और भी विलक्षण है। लंका जलाने का प्रबंध आप रावण से ही करा रहे हैं। बताइए ! भला मैं कहाँ से घी, तेल एवं कपड़ा लाता। सारी व्यवस्था आप ही कराये दे रहे हैं और जिससे कराना है, उससे आप वह करा लेते हैं। व्यक्ति की व्यर्थ धारणा बनी हुई है कि कार्य करने वाला मैं हूँ। वस्तुतः कार्य कराने वाले तो वे ही हैं। जिससे जो चाहते हैं, करा लेते हैं।

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