Friday, 6 November 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

चार प्रमुख रोग हैं, जो हमारे अन्तःकरण को आक्रांत कर विविध रूपों में प्रकट होते हैं, इन सब रोगों के निदान में यह विभाजन सहायक सिद्ध होता है। कुछ रोग काम प्रधान होते हैं, तो कुछ क्रोध प्रधान और कुछ लोभ प्रधान। जैसे आसक्ति काम प्रधान रोग होता है और इसका केन्द्र है मन। हिंसा क्रोध प्रधान रोग है और इसका केन्द्र है अहंकार। स्वार्थपरक वृत्तियाँ लोभ से जुड़ी हुई हैं, जहाँ कि बुद्धि की प्रधानता है। इस तरह अनगिनत व्याधियों से हमारा अन्तःकरण आक्रांत है और हमारा अन्तःकरण ही नहीं, बल्कि सारा समाज इन व्याधियों से आक्रांत है।

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